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________________ 461 ८८ अष्टी ११ ००८ मुनि Šantınālha Jain Blandūrn Cambay माघअन्वय वा २९९ मुजाल श्रेष्ठी माघवद चैत्य मुजाल पडित लेखक २५२ माटरगोत्त मुनिगोत्र मूणाग अष्टी २९५ माइ प्रेष्ठिपत्नी ३२, २५७, ३०६ । मूलदेव ३४८ * माणिमा अष्टिपुत्री १२२ मूलराज ३०५, ३७०, माणिस्य ३९७,४०५ माणिक्यचद्रसूरि मुनि मेइणी श्रेष्टिपुत्री ३०८ माणिक्यतिलक ग्रयनशोवक्मुनि १०६ मेघदतटीका उद्धरणग्रंय २७७ माणिभद्द ३९, ४५ मेघा अष्टी मातुका अष्टिपुत्री १२२ मच्छिगोत्त मुनिगोत्र मावल अष्टी मेदपाटदेश-मंडल प्रान्त ८२, ३८८,४४१ मानतुंगसूरि मुनि २१९, २४८, २५९, मेलाद साध्वानी श्रेष्ठिपत्नी ४४१ २६०, ३५१ / महिल श्रेष्मी मानदेवरि ,, ११४,११७, २३१, २५९, मोट वश ३६४, ३८९ २६० ३३९, ३७२ अष्टी ३२१ मानिक १० १९१ मोढचैत्यगृह ज्ञाति मारावही नगरी मोल्हा श्रेष्टी मालव प्रान्त १४६,३०४,३५३, मोपाक मनीभागनंय ३२८ ३७०, ४०० मोह्ण श्रेष्टी ११९ ज्ञायाः सस्थापनकर ३७० मोहन ११६ मालाक मोहिणी ३२,७९, मालाक कायस्य लेखक ३०७, ३६९ मालारोपण जैनधार्मिक क्रिया मोहिनी प्रेष्ठिपुत्री-लेखक ८० माल्दणदेवी श्रेष्टिपत्नी अष्ठिपत्नी २८०,२९५,३७८ माल्हाक श्रेष्ठी मोही श्रेष्ठिपुत्री ५३, ३४९ मात्हे अष्टिपुत्री १०७ मौली फणिफणा सप्त नयश्रीभिः करा इव । मिहिला नगरी ३९, ४५ / धृताः शान्तरसास्वादे यस्य पार्श्व स पातु वः ॥ मुकुट नृप ३५५ ३१७ मुनिचद्र अष्टी ३०२ यक्षदेव श्रेष्ठी १११,२९५ मुनिचंद्रसरि मुनि ६४, ११४, ११९, २०४, यत्युपासक १३० २८७-८, ३३३, ३७२, ३९६ । कुल ३५५ मुनिदेवमूरि ३३३ | यमुना नदी ६७ मुम्मुणिदेवशैवभट्टारक ४१४ यशवर मुंज नृप ३४४ यश कुमार २५७ मुजपुर ग्राम ३४४ ] यशश्चन्द्र ३४८ ३८९ माल श्रेष्टी श्रेष्ठिपुत्री य? ३३५
SR No.010183
Book TitleCatalogue of Palmleaf Manuscripts in Santinatha Jain Bhandara 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorPunyavijay
PublisherUniversity Publication Baroda
Publication Year1966
Total Pages310
LanguageHindi
ClassificationCatalogue
File Size10 MB
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