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________________ 454 जंघराल अंबू जासड जासल जासी जिनचन्द्र ग्राम जंबूदीपप्रज्ञप्ति जाइणिमयहरियाए रइया एते उ धम्मपुतेण हरि - दूसरे उपनाम जाउका श्रेष्टिपुत्री जाजा श्रेष्टी जानाक लेखक श्रेष्टी जाल्हण जाल्हणदेवी श्रेष्ठांनी श्रेष्टी जिनचन्द्रसूरि जिनदत्तसूरि मत्री उद्धरण थ श्रेष्टिपत्नी श्रेष्ठि पुत्री श्रेष्टी ور जिनदासगणमहत्तर, 33 ५६, ९२, २८१ मुनि १९, २८६, ३४१, ३८४ ३८८. ३८९, ४४१ ८६, ३१८, ३२१, २२ ३२६, ३२८, ३२९, ४४१ ५८ ار जिनदेव श्रेष्ठी जिनदेव उपाध्याय मुनि जिनप्रबोधसूरि जिनभद्रगणिक्षमाश्रमण, जिनभद्रसूरि " जिनराजसूरि जिनवर्ध-सूरिर्विद्यमाने सति पत्तने लिखितं जिनसागरसू रे मुनि जिन सिंह सूरि जिनेश्वरसूर 31 ३३ | जियसत्तू ३७७ जिंद ४३९ २१२ ३६०, ६६९ जे ये, सल ३.९ | जेसिरि ८८ जेह ११९ २५६, ३६० ८, २०, ३५, ४९ ३३, ३४८ जैनदेवी ९, ३६० | जनहि २७५ ६५ ३९१ २३९ विराचार्य पादोर्जीवि अभ्यदेवाचायणां जिनेश्वराहस्य सर्वदा नि सब विहार त्य शिष्येणाभ्यदेवसूरिणा BE Catalogue of Palm-Leaf Mss. in the नृप ३९, ४५ श्रेष्टो २५७ मुनि २४३ ४४१ ३५४, ३५५, ३५६ ,, १८, १९, २३, ३०, ३१ ३२ ३४ ३६ ३४१, ३४४ ३५४, ३८४ जीव उत्तरि जीवसूरि जीवाभिगनत्ति उत्तरणथ श्रेष्टी ૪૪૦ ४८० " जनशासन १९,८६,४४१ | ठक्कुराणी डाउय डिडिलवनिवेस डिंडद झणकू झंझुल झांझ क टींबा ठकुर ड्वानक ess ढाकचय जोतिसगणरायपण्णत्ती उद्धरण ग्रंथ जोमण श्रेष्टी जाता वर्माव्यारयान उपरणग्रंथ ज्ञाताधर्मकथनादि चतुष्टयसूत्रवृत्ति ज्ञाता धर्मकयागादि षडंगीसूत्रवृत्ति श्रेष्ठि श्री श्रेष्टी णाणमजूसा ३० णायात्रम्मकहा و" टरनी श्रेष्टी ववित्नी नृप मश्री ९६ २७८ धर्मसप्रदाय ११०, ३२८ ३३३, ३५५, ३८५ ૪૭ २३१, २३२ २४ २५, २७ ३२ १२३ २५ 33 31 ग्राम १२१२६३ ४१ पदवी ७ १४३ २५१, २०७, २८५, २९८ ३३ ३४२ :५१ ३६४ ३७३ ३१४ ३१४ ८१ २.६ ५७ श्रेष्ठी ग्राम ÷१८ ३२२ ३२६ १८ ११९ ર્ડ ९ श्रेष्ठी २.८ ज्ञानभंडार उद्धरणथ २१ २२, २४, २७ २८, २०२ ३६ | तद्विशिववादिनः किल महाकालागतो निर्जयो ३५५,
SR No.010183
Book TitleCatalogue of Palmleaf Manuscripts in Santinatha Jain Bhandara 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorPunyavijay
PublisherUniversity Publication Baroda
Publication Year1966
Total Pages310
LanguageHindi
ClassificationCatalogue
File Size10 MB
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