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________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir पंचकप्पो - (७७०) ७७०॥ I७७१11* ७७२||* ७७३॥ ॥७७४|| ७७५|| 11७७६|| তাঙll 1७७८॥ (७७०) उग्गममादी दोसा सब्वे यजहक्कमेण वत्तव्या जह मणिय पिंडजुत्तीय नवरिइमो पूतिऍविसेसो (७७१) संचय कोष्टगदारुय डाएतए गोरसे य लोणेय लंबण नेहे हिंगू दालिम तह तित्तए चेव (७७३) अगडारामे पुत्ते तुंबे फलही तहेव गाओय एतारिसमुप्पन्ने गहणं किं कस्स केरिसयं (७७३) पत्तस्स उक्खेवो गोरसमादी तु संचतोहोति सो संघटा ठवितो मावे अवोच्छिणि अग्गिझो (७७r) अत्तट्ठिय परिमुत्ते कप्पति मायम्मिताहे वोच्छिण्णे कह वोच्छिज्जति भावो सोतूणअफासुदोसंतु (७७५) कोटग तंदुल तिछडा समणट्ठार्सिकडा न कप्पति अह दुछड संजयट्ठा आयोवक्कडा कप्पे (७७६) आयट्ठाए दुछडा संजयअट्टाए तिछड न कप्पे जदिऽविय आयट्ठाए आरंभो होति तेसिंतु (७७७) एमेव दारुसागाइयाइंजाइं अफासुदव्वाई अतद्वनिद्विताई कप्पे समणट्ठनवि कप्पे (७७८) गोरसहिंगूतेल्लादि दालिमे तित्तकडुयदव्वाई लंबण गुलोय भण्णति संचियमेवादि संघट्टा (७७९) फासुगदव्या जे तू अब्बोच्छिन्नम्मि मावे न तु कप्पे उवखडिया वत्तट्ठा वोच्छिण्णे मावे कप्पंति (७८०) अगडं वखणेशाही आरामंयावि अहव रोवेला संजयनिमित्त कोई पाणफलाइंच दाहंति (७८१) तत्यवि संजयजोग्गा संजयअट्ठा कया न कप्पंति अत्तद्वाएँ कता पुण कप्पंती तंदुला जहतु (७८३) पुतंजणेज कोई आयरिओमज्झ अपरियारोत्ति तेसि सहातो होहिति पव्वावेतुंतु सो कप्पे (७८३) मायणअद्वा तुंबिओ वावे फलहीय वत्तमातवा संजयठाए जा सुत्त अत्तवियम्मि पुण कप्पे (७८r) रूतो संजयठाते आतहासुत्तमादिकन कप्पे जम्हा गहणअजोग्गो तुसंजतद्वाए कारिततो (७८५) संजतअट्ठा वियितो आतटोवहितोय करतोय कप्पति जम्हा य कतो संजतजोग्गोतु आतहा (७८६) एवं गावीओवी कोइ किणिज्जाहि संजयट्ठाए आतट्ट दूढ कप्पे समणवादूढ नो कप्पे (७८७) एसो प्रतिविसेसो भणितो पव्वं तपिंडजत्तीए एतो उवहीकप्पं वोच्छामि गुरूवएसेणं ७७९॥ ७८०110 |७८१110 ७८२० ७८३॥ ॥७८४॥ ॥७८५ ॥७८६ ७८७॥ For Private And Personal Use Only
SR No.009767
Book TitleAgam 38B Panchkappabhasa Chheysutt 05B
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherAgam Shrut Prakashan
Publication Year1996
Total Pages164
LanguagePrakrit
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, Agam 38, & agam_panchakalpa_bhashya
File Size3 MB
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