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________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra नवमं सतं उद्देसो- ३२ - www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir १९१ होजा जाव अहवा एगे सकुकरप्पभाए एगे पंकप्पभाए एगे अहेसत्तमाए होना अहवा एगे सक्करष्पभाए एगे धूमप्पभाए एगे तमाए होज्जा अहवा एगे सकूकरप्पभाए एगे धूमप्पभाए एगे अहसत्तमाए होजा अहवा एगे सक्करष्पभाए एगे तमाए एगे अहेसत्तमाए होजा अहवा एगे वालुयष्पभाए एगे पंकप्पभाए एगे धूमप्पभाए होला अहवा एगे वालुयप्पभाए एगे पंकप्पभाए एगे तमाए होज्जा अहवा एगे बालुयप्पभाए एगे पंकष्पभाए एगे असतभाए होज्जा अहवा एगे वालुयप्पभाए एगे धूमप्पभाए एगे तमाए होना अहवा एगे वालुयप्पभाए एगे धूमप्पभाए एगे अहेसत्तभाए होजा अहवा एगे वालुयप्पभाए एगे तमाए एगे अहेसत्तमाए होज्जा अहवा एगे पंकप्पभाए एगे धूमप्पभाए एगे तमाए होज्जा अहवा एगे पंकप्पभाए एगे धूमष्पमाए एगे अहेसत्तमाए हा अहवा एगे धूमप्पभाए एगे तमाए एगे अहेसत्तमाए होज्जा वत्तारि भंते नेरइया नेरइयपबेसणएणं पविसमाणा किं रयणप्पभाए होना- पुच्छा गंगेया रयणप्पभाए वा होजा जाव अहेसत्तमाए वा होज्जा अहवा एगे रयणप्पभाए तिष्णि सक्करप्पभाए होजा अहवा एगे रयणप्पभाए तिण्णि वालुयप्पभाए होजा एवं जाव अहवा एगे रयणप्पभाए तिण्णि असत्तमाए होजा अहवा दो रयणप्पभाए दो सक्करप्पभाए होज्जा एवं जाव अहवा दो रयणप्पभाए दो असत्तमाए होज्जा अहवा तिण्णि रयणप्पभाए एगे सक्करप्पभाए होजा एवं जाव अहवा तिण्णि रयणप्पभाए एगे असत्तमाए होज्जा अहवा एगे सक्करप्पभाए तिण्णि वालुयप्पभाए होज्जा एवं जव रयणप्यभाए उवरिमाहिं समं चारियं तहा सक्करप्पभाए वि उवरिमाहिं समं चारेयव्वं एवं एक्क्काए समं चारेयव्वं जाव अहवा तिण्णि तमाए एगे सहेसत्तमाए होजा अहवा एगे रयणसभाए एगे सक्करप्पभाए दो बालुयप्पभाए होज्जा अहवा एगे रयणप्पभाए एगे सक्करप्पभाए दो पंकप्पभाए होजा एवं जाव एगे रयणप्पभाए एगे सक्करप्पभाए दो आहेसत्तमाए होज्जा अहवा एगे रयणप्पभाए दो सकूकरप्पभाए एगे वालुयप्पभाए होजा एवं जाव अहवा एगे रयणप्पभाए दो सकुकरप्पभाए एगे असत्तमाए होज्जा अहवा दो श्यणप्पभाए एगे सक्करप्पभाए एगे वालुयप्पमाए होजा एवं जाव अहवा दो रयणप्पभाए एगे सक्करप्पभाए एगे अहेसत्तपाए होज्जा अहवा एगे रयणप्पभाए एगे वालुयप्पभाए दो पंकम्पभाए होजा जाव अहवा एगे रयणप्पभाए एगे वालुयप्पभए दो असत्तमाए होज्जा एवं एएणं गमएणं जहा तिन्हं तियासंजोगो तहा भाणियव्वो जाय अहवा दो धूमप्पभाए एगे तमाए एगे असत्तमाए होला अहवा एगे रयणप्पभाए एगे सक्करप्पभाए एगे वालुयप्पभाए एगे पंकष्पभाए होज्जा अहवा एगे रयणप्पभाए एगे सक्करप्पभाए एगे वालुयप्पभाए एगे धूमप्पभाए होजा अहवा एगे रयणप्पभाए एगे सक्करप्पभाए एगे वालुयप्पभाए एगे तमाए होचा अहवा एगे रयणप्पभाए एगे सक्करप्पभाए एगे चालुयप्पभाए एगे अहेसत्तमाए होजा अहवा एगे रयणप्पभाए एगे सक्करप्पभाए एगे पंकप्पभाए एगे धूमप्पभाए होज्जा अहवा एगे रयणप्पभाए एगे सकरप्पभाए एगे पंकप्पभाए एगे तमाए होज्जा अहवा एगे रयणप्पभाए एगे सकूकरप्पभाए एगे पंकष्पभाए एगे अहेसत्तमाए होज्जा अहवा एगे रयणमाभाए एगे सक्करप्पभाए एगे धूमप्पभाए एगे तमाए होज्जा अहवा एगे रयणप्पभाए एगे सक्करप्पभाए एगे धूमप्पभाए एगे अहेसत्तमाए होजा अहदा एगे रयणप्पभाए एगे सक्करष्पभाए एगे तमाए एगे अहेसत्तमाए होना अहवा एगे रयणप्पभाए एगे चालुयप्पभाए एगे पंकप्पभाए एगे धूप्पभाए होजा For Private And Personal Use Only
SR No.009731
Book TitleAgam 05 Vivahapannatti Angsutt 05 Moolam
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherAgam Shrut Prakashan
Publication Year1996
Total Pages514
LanguagePrakrit
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, Agam 05, & agam_bhagwati
File Size10 MB
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