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________________ (१५७) मत प० मोजा, प. सोमा सुत आशा हचकूभ्यामात्मडसे देहरी कारापिता। देवकुलिकासंख्या ३८ स्तंभोपरि ( ३०२) सं० १५३४ वैशाखवदि १० सोमे सं० रतना साथी न्याति श्रीमालगोत्रीयक सं० जीवा पुत्र सं. मांडण, जीवन, जीवदेव, खेता सहित मांडलगढ़थी यात्रार्थ) आया। देवकुलिकासंख्या ४१ (३०३) संवत् १४२१ वर्षे ज्येष्ठसुदि १० बुधे मूलनक्षत्रे सिद्धिनामयोगे श्रीउपकेशज्ञातीय चीचटगोत्रे वीसदान्धये सा० लखण मुत आजडात्मज शाह गोसल सुत सा देसल भार्या भोली पुत्राः सा सहज सा० माहण सा० समर, माहण भार्या भावलवे पुत्र सं० धना सा० कडूआ सा लिंखा भागिनी बाई मुकतु समस्तसाथैः साध्वीभावलदेवीभिरास्मश्रेयसे श्रीपार्श्वनाथचैत्ये देवकुलिकाका उपकेशगच्छे ककुदाचार्यसंताने कक्कसूरीणां पट्टालंकारदेवगुप्तसूरीणामुपदेशेन शुभं भवतु। "Aho Shrut Gyanam"
SR No.009682
Book TitleJain Pratima Lekh Sangraha
Original Sutra AuthorN/A
AuthorYatindrasuri, Daulatsinh Lodha
PublisherYatindra Sahitya Sadan Dhamaniya Mewad
Publication Year1951
Total Pages338
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari & History
File Size5 MB
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