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________________ प्रमैयचन्द्रिका टीका श०१० उ०५ २०२ चमरेन्द्रादीनामप्रमहिषीनिरूपणम् १६७ षट् मग्रमहिष्यः प्रज्ञप्ताः, 'तंजहा-इला १, मुक्का २, सदारा ३, सोदामणी ४, इंदा ५, घणविज्जुया ६,' तद्यथा-इला १, शुक्रा २, सदारा ३, सौदामिनी ४, इन्द्रा ५, घन विद्युत्काच । ' तत्थणं एगमेगाए देवीए छ छ देवीसहस्सा परिवारो पण्णत्तो' तत्र खलु षट्सु धरणाग्रमहिषीषु मध्ये एकैकस्या देव्याः षट् षट् देवी सहस्राणि परिवारः प्रज्ञप्तः । 'पभूणं ताओ एगमेगादेवीए अन्नाई छ छ देवी सहस्साई परिवार विउवित्तए' प्रभुः समर्था खलु ताभ्यः षड्भ्यः अग्रमहिषीभ्यः एकैका देवी अन्यानि षटू षट् देवीसहस्राणि परिवारम् विकुर्वितम् , 'एवामेव सपुवावरेण छत्तीसं देवीसहस्साई, सेत्तं तुडिए ' एवमेव सपूर्वापरेण पौर्वापर्येण पट्त्रिंशत् देवीसहस्राणि परिवारो भवतीति भावः। तदेतत् त्रुटिकं नाम वर्गउच्यते। स्थविराः पृच्छन्ति-'पभूणं भंते ! धरणे सेस तंचेव' हे भदन्त ! प्रभुः समर्थः 'अज्जो छ अग्गमहिसीओ पण्णताओ' हे आयो । धरणकी ६ अग्रमहिषियां कही गई हैं । 'तं जहा- इला, सुक्का, सदारा, सोदामणी, इंदा, घणविज्जुया' उनके नाम इस प्रकार से हैं-इला, शुक्रा, मदारा, सौदामिनी, इन्द्रा और घनविद्युत्का, 'तत्वणं एगमेगाए देवीए छ-छ देवी सहस्सा परिवारो पण्णत्तो' इनमें एक एक देवीका देवी परिवार ६-६ हजार देवियों का है 'पभूणं ताओ एगमेगा देवी भन्नाई छ देवी सहस्साई परिवारं विउवित्तए' क्योंकि इन छह अग्रमहिषियों के बीच एक एक देवी अन्य और ६-६ हजार देवियों के परिवार की विकर्वणा कर सकती है. 'एवामेव सपुव्वावरेण तीसं देवी सहस्साइं, से तं डिए' इस प्रकार धरण की देवियों का सब परिवार ३६ हजारका हो जाता है. इस छत्तीस हजार देवी परिवार का नाम ही देवी वर्ग है। नाम मा प्रभार छ-" इला, सुफा, सदाग, सोदामणी, इदा, धणविज्जुया" (१) Sel, (२) शुन, (3) सा२१, (४) सोभिनी, (५) न्द्र। सने (९) धनविधु.४!. “ तत्थणं एगपगाए देवीए .. रेवीसहस्साई परिवारो पणत्तो" ते प्रत्ये पट्टराणीना देवीपरिवार १-१ १२ वीमान छ, “पभूणं ताओ एगमेगा देवी अन्नाई छ छ देवीसहस्साइ परिवार विउव्वित्तए" २५ ते प्रत्ये પટ્ટરાણી પોતાની વક્રિયશક્તિથી બીજી છ છ હજાર દેવીઓનું નિર્માણ કરી शवाने समय डाय छे. “एवामेव सपुव्वावरेण छत्तीसं देवीसहरसाई, से त्त तुडिए" मा शत घान्द्रने। भुस हेवीपरिवार 3६८०० थाय छे. माछत्रीय હજારના દેવીપરિવારને ત્રુટિક (ગ) કહે છે,
SR No.009319
Book TitleBhagwati Sutra Part 09
Original Sutra AuthorN/A
AuthorGhasilal Maharaj
PublisherA B Shwetambar Sthanakwasi Jain Shastroddhar Samiti
Publication Year1967
Total Pages770
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_bhagwati
File Size45 MB
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