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________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org तपोधनाय शान्ताय, नोन्मादनविकारिण चिदानन्देन पूर्णाय, मत्सरं नैव कुर्वते . सर्वलब्धिनिधानाय, चतुर्थज्ञानधारिणे गौतमाय गणेशाय नमस्तस्मै त्रिशुद्धितः.. Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir । ।८ ।। ५. मुनिसुन्दरसूरि - विरचितं प्राकृतसंस्कृत श्री गौतमगणधरस्तोत्रम् जयसिरिविलासभवणं, वीरजिणंदस्स पढमसीसवरं । सयल गुणलद्धिजलहिं सिरिगोयमगणहरं वंदे... ॐ सह नमो भगवओ, जगगुरूणो गोयमस्स सिद्धस्स । बुद्धस्स पारगस्सय, अखीणमहाणसस्स सया.. अवतर अवतर भगवन् मम हृदये भास्करीश्रियं विभृहि । ॐ ह्रीं श्रीं ज्ञानादि वितरतु तुभ्यं नमः स्वाहा.. वसई तुह नाममंतो जस्स मणे सयलवंछियं दितो । चिंतामणिसुरपायव-कामघडाइहिं पि किं तस्स... सिरिगोयम- गणनायग तिहुअणजणसरण दुरियदुहहरण | भवतारण रिउवारण होसु अणाहस्स मह नाहो... मेरुसिरे सिंहासण-कणयमहासहसपत्तकमलठिअं । सूरिगण झाणविसयं ससिप्पहं गोयमं वंदे.. सव्वसुह-लद्धिदाया सुमरियमित्तो वि गोयमं भयवं । पइट्ठिअ - गणहरमंतो दिज्ज मम वंछियं सयलं.. इय सिरीगोयम -संथुअ मुणिसुंदर थुइ पयं मए वि तुमं । देहि महासिद्धि-सिवफलयं भुवणकप्पतरुवरस्स. ६ For Private And Personal Use Only ।।७।। 119 11 ।।२।। ।।३।। ।।४।। ।।५।। ।।६।। ।।७।। १८ ।।
SR No.008568
Book TitleGautam Nam Japo Nishdish
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDharnendrasagar
PublisherMahavir Jain Aradhana Kendra Koba
Publication Year2001
Total Pages124
LanguageGujarati
ClassificationBook_Gujarati & Worship
File Size5 MB
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