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________________ जैन भाषासाहित्य. नाम. श्लोकः कर्ता. च्या क्या छ? -- - - - - | पा १ हमवृहद्वृत्ति (दुढिका )A » दुढिका (धृहत् ) B८००० सौभाग्यसागर १५९१ पा. ३३. , दुढिका (लघु) २३००० भाव.म.२ ,, वृत्ति पत्र २१४ उदयसौभाग्य भाव. " बृहद्वृत्तिसारोद्धार पर ४१ , लघुवृत्ति स्वोपड़ पाः १. , लघुवृत्ति काफलकायस्थ । कृपा. १-२ खं हेमलघुवृत्ति दुढिका D३२०० मुनिशेखर वृ. पा. १-३ » , अवचूरि E २२१३ "" अवचूरि पत्र ६५ धनचंद्र पा.१-२-४-५ हेमाचार्य वृपा.१ ., प्राकृतपादवृत्ति २४८५ स्वोपन्न " दीपिका (वि.) हरिभद्र कृ. पा.१ " ॥ अवचूरि हरिप्रभसूरि पा.१ , प्राकृतव्याकरण - - -- - - - A आ हुँढिका चतुष्क, आख्यात अने कृद् उपर छे. B आ लघुवृत्ति चतुष्क, आख्यात, कृद् अने तद्धित उपर छे. पाटणनी टीपोमा एनी लोकसंख्य १५००. नी आपी छ, C एजें अपर नाम "व्युप्तचिदीपिका एवं छे. डेक्कन कॉलेजना लिस्टमा एना कर्ता उदयसौभाग्या जणाव्या छ, अने भावनगरनी टीपमा लघुढंढिकानी वृत्तिने करनारना नाममा तेमनी नोंध करी छे, ते उपरथी एम मालम पडे छे के भावनगरमां जगावेली लघुटुंढिकावृत्ति अने आ ग्रंथ एकज हो, छतां चोकस खात्री माटे तेमनी प्रतो तपासवी जोइये, अमदावादना चंचलबाईनी टीपमा हर्षकुलकृत लघुटुंढिका पत्र ११३ नी छ एम जणाव्ये के D ढुंढिकाने दीपिका पण कहेवाय छे. E आ अवचूरि चतुष्क वृत्तिना उपर करेली छे. F आ प्राकृत व्याकरण ते सिद्धहेम शब्दानुशासननो आठमो अध्याय छे.
SR No.008418
Book TitleJain Granthavali
Original Sutra AuthorN/A
AuthorJain Shwetambar Conference
PublisherJain Shwetambar Conference Mumbai
Publication Year
Total Pages504
LanguageGujarati
ClassificationBook_Gujarati & Catalogue
File Size7 MB
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