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________________ जैन औपदेशिक. नाम. कर्ताःच्या क्या छ ? १९४, भयहरस्तोत्र जिनसिंह वृत्ति डे. पे. ३४. भरतक्षेत्रीयजिनस्तुति १६ भवानीसहस्त्रनाम । २०५ भारती १०८ नाम स्तवन भूपालचतुर्विंशतिका दिगंबर मंगळादीश्वरस्तोत्र A का . १४ | धर्मसूरि मंत्रस्तव वृत्ति मंत्रबीजकोश महायमकमयपार्श्वस्तोत्र B| ४० । पद्मप्रभ महादेवद्वात्रिंशिका महादेवस्तोत्र महावीरस्तोत्र पार्श्वचंद्र वृत्ति भाव. पा. ५ पा.५ भावप्रभ A आ नाम काइक शक पडतुं लागे छ कारणके तपास करतां एम मालम पडे छ के पिटर्सन रिपोर्ट पांचमामां जणावलं अने आ पुस्तकमां कुलकोना वर्गमां नौधेलु नामे मंगलकुलक तेज ए होवू जोईये. ( जुओ आ पुस्तकना पेज २०२ मां ) B सदरहू स्तोत्र जेसलमेरनी हीरालालनी करेली टीपमा नोंधेलु होवाथी शक पडतुं छे. cा पार्श्वचंद्र ते कोण हता ते जाणवा माटे तेनी प्रत तपासी नक्की करवं जोईये.
SR No.008418
Book TitleJain Granthavali
Original Sutra AuthorN/A
AuthorJain Shwetambar Conference
PublisherJain Shwetambar Conference Mumbai
Publication Year
Total Pages504
LanguageGujarati
ClassificationBook_Gujarati & Catalogue
File Size7 MB
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