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पाठ सातवाँ
भगवान आदिनाथ
बेटी – माँ, चलो न घर! माँ - चलती तो हूँ, जरा भक्तामरजी का पाठ कर लूँ। बेटी – भक्तामरजी क्या है ? माँ - भक्तामर स्तोत्र एक स्तुति का नाम है, जिसमें भगवान आदिनाथ की
स्तुति (भक्ति) की गई है। बेटी – माँ, आदिनाथ कौन थे जिनकी स्तुति हजारों लोग प्रतिदिन करते है ? माँ - वे भगवान थे। वे दुनियाँ की सब बातों को जानते थे तथा उनके
मोह-राग-द्वेष नष्ट हो चुके थे, इस कारण परम सुखी थे।
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