SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 264
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ उत्पति कचिडवते तत्रारोहका विपना सम्प्रयाच सपड़ागायमित्यव ध्वजोग बड़ा दियुतदितरामुपताका मदिघीमापति नन्दी हाय निर्दोष तथा मना मद महरि५ । पाला वाहन तिमिमा मोर मंगो१११२ रनमो मतिविषो वा परिता सह विवियोकाभि पुषसिमि यज्जार्थ नाके तदामरच विशेपोन परिषिमा परिचरिता तथा म [[कविता]याचं साहिबहिरिभवानि चित्रानि विविधानि ते नियामि तिमोयाभिधानतनसम्बन्धीनि वनितानि कोसोपषिद्वदंताय पण मरियद्यभूमिया घरपुरिमागेष्वगसएउत्ताणं पट्टमयंगयार्थ पुरोयापुबोए • संपतिय तयानंतर सछत्ताण मक्याचं सर्वार्थ सपड़ागाणं मतोग्यपराणं सादितोमानं ममिগिাन परिक्वित्तायं प्रेमवयवेन्स तिथि सकला णिज्जतदार प्राणं कालायस सुकयो मित्रतकम्मार्थ मुमिलित मडल बरप्रधानपुत्रमपारोडगपद्येोतार तैयई बरोस बुडते पद्मावर एबस उपनपाठनप्रती पुरषोपायलिया तक्ष्म तरतिवारपछी रोने सहित मायश्रीनरं सहित पंठार करो सहित पता थामाटोयजातेति रोहितको मत म दोघोबतून प्रामन्दवे पश्वरीसहित लिथियम बेटिया तेजास पाभर विपते पर रिक्तमति दिपगमोपमाि विचित्रहवातिविसका ठरवनाथ र कनक व मित्तवति दाब काउबेचना वामायसवाल पोमोचते परको मुखमनाने मिचक्रधारापा हात्तिबाटुवा मंडल पड़ाना हमारा भाषीयंत्रातिवंतबर पधातुरमपोड़ने पर जरो मे पशु सेवा तयार -- २०७०
SR No.007378
Book TitleAgam 12 Upang 01 Aupapatik Sutra Shwetambar
Original Sutra AuthorN/A
AuthorRai Dhanpatsinh Bahadur
PublisherRai Dhanpatsinh Bahadur
Publication Year1896
Total Pages466
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, Conduct, & agam_aupapatik
File Size9 MB
JainGPT.orgInstagram
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy