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________________ 61 पिला रखने के यातने डबीने समनवीचे सरज छता 4 यहाँ राड छता तूमे समक न राडो नेवा लोट तो नही ४. तमे लोजा साधु होय तेने या इमाडी कव होवा छो वात सोलजीने तरक्वता थी वियारी रांडो तेवा छो सला:- खा शिक्षण हितकारी न तेना घुगर याली डि प्रेम के नही. साहेज: वस्तु नरियात सारी हे वाच. सोह माटे यांग रागावली पड़े थे એ પઢવી દાડે તેવી બી પી એ ત્યારે પ कार सवावी न शडाचं खेम तो जन ચણાની ते जधी · मोटालागमा चोहोक - 4 खइनट बगर रा हवा खाव तो नुकशान Poison छे छता हवा चहा होती खेम न दुहेवांच के हवा सादीछे उपयोगिता, शुं सार ने शुं खोड ते थडे छे, मारे अनिवार्यता, कधी कही वालो गोंडवाचेला छे 30 खत्यारे शिक्षामा खेवा तच्वो सीधी लाव हिंसा धाय हो हृव्य हिँसा उरता लाव-हिंसा हुई गली खराज छे मालसने मारी बाखवाया तो खासी हव्यहिंसा थाय छे. तेना लाव चलानो नाश बधी धतो. क्यारे माहासना सहगुगोची धर्मधी भ्रष्ट डरोतो लाव हिंसा थाय. कल्पसूत्रमा हश खडेश खावे छे नेमा खेड परछे३ से छेडे युगांलक मनीने नरहे गया. खेड माफी छे, बेने सुंहब पत्नी छें, मैंनु उप छे खावा सामान्य मालसन अद्दलून सुंदर पत्नीने राभखे खेड वखत भेा, खने तेथी
SR No.005862
Book TitleAnukampadan
Original Sutra AuthorN/A
AuthorYugbhushanvijay
PublisherZZZ Unknown
Publication Year
Total Pages400
LanguageGujarati
ClassificationBook_Gujarati
File Size8 MB
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