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________________ (१२) ॥७॥ इहलोके परलोकें सुखनो, दायक व्रत बेबी जो हे ॥स०॥ सत्यवचन जे बोले प्राणी, ते उपर मत खीजो हे॥ स० ॥ ७॥ सत्यवचननां एहवां फल , मन मानो ते चाखो हे ॥स॥ मृषावाद परहरवा केरी, प्रज्ञा सहुको राखो हे ॥ स ॥ ए॥ मानतुंगने मानवतीनो; रास रच्यो में रूमो हे॥सण॥ खेजो कविजन एह सुधारी, होये जे अक्षर कूमो हे॥ स० ॥ १०॥ में तो करी बालक क्रीमा, हुं सुं जाणुं जोडी हे ॥ स० ॥ हासो कोइ म करसो को विद, मत को नाखो विखोमी हे॥ स ॥११॥ चनविद संघना आग्रहथकी में, कीधो रास रसिलो हे॥स ॥ जे कोइ नणसे सुणसे प्राणी, ते लहेसे शिवचेलो हे ॥ स० ॥ १२ ॥ पूरण काय ६ मुनि ७चंड १ सुवर्षे ॥ १७६० ॥ वृद्धिमास शुरूपदें हे ॥ स० ॥ अष्टमी कर्मवाटी उदयिक, सौम्यवार सु प्रत्यदें हे ॥ स ॥ १३ ॥ श्रीविजयसेनसूरिपय सेवक, कीर्ति विजय उवजाया हे ॥ स ॥ तास शीस संयम गुणलीना, मान विजय बुझ राया हे ॥ स० ॥ १४ ॥ तास शिष्य पंमित मुकुटमणि, रूप विजय कविराया हे ॥ स ॥ तास चरण करुणाथी Jain Educationa International For Personal and Private Use Only www.jainelibrary.org
SR No.005386
Book TitleMantung Raja ane Manvati Ranino Ras
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShravak Bhimsinh Manek
PublisherShravak Bhimsinh Manek
Publication Year1906
Total Pages132
LanguageGujarati
ClassificationBook_Gujarati
File Size16 MB
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