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________________ भगवई स. 20 उ. 6 903 गवरं तेहिं संपाउणेज्जा इमेहि आहारो भण्णइ सेसं तं चेव / पुढविक्काइए गं भंते ! इमोसे रयणप्पभाए सक्करप्पभाए य पुढवीए अंतरा समोहए समोहणित्ता जे भविए ईसाणे कप्पे पुढविक्काइयत्ताए उववज्जित्तए एवं चेव, एवं जाव ईसिप्पन्भाराए उववाएयव्यो / पुढविक्काइए गं भंते ! सक्करप्पमाए पुढवीए वालुयप्पभाए पुढवीए अंतरा समोहए 2 ता जे भविए सोहम्मे जाव ईसिप्प. उभाराए, एवं एएगे कमेणं जाव तमाए अहेसत्तमाए य पुढवीए अंतरा समो. हए समाणे जे भविए सोहम्मे कप्पे जाव ईसिप्पन्भाराए उववाएयव्वो। पुढवि. क्काइए णं भंते ! सोहम्मीसाणाणं सणंकुमारमाहिदाण य कप्पाणं अंतरा समोहए 2 त्ता जे भविए इमीसे रयणप्पभाए पुढवीए पुढविक्काइयत्ताए उव. वज्जित्तए से णं भंते ! कि पुग्वि उववज्जित्ता पञ्छा आहारेज्जा सेसं तं चेव जाव से तेणठेणं जाव णिक्खेवओ। पुढविक्काइए गं भंते ! सोहम्मीसाणाणं सणं. कुमारमाहिदाण य कप्पा अंतरा समोहए 2 ता जे भविए सक्करप्पभाए पुढवीए पुढविकाइयत्ताए उववज्जित्तए एवं चेव, एवं जाव अहेसत्तमाए उव. वाएयव्वो, एवं सणंकुमारमाहिंदाणं बंभलोगस्स य कप्पस्स अंतरा समोहए समो. हणित्ता पुणरवि जाव अहेसत्तमाए उववाएयव्यो, एवं बंभलोगस्स तगस्स य कप्पस्स अंतरा समोहए पुणरवि जाव अहेसत्तमाए, एवं लंतगस्स महासुक्कस्स कप्पस्स य अंतरा समोहए पुणरवि जाव अहेसत्तमाए, एवं महासुक्कस्स सहस्सारस्स य कप्पस्स अंतरा पुणरवि जाव अहेसत्तमाए, एवं सहस्सारस्स आणयपाणयकप्पाणं अंतरा पुणरवि जाव अहेसत्तमाए, एवं आणयपाणयाणं आरणअच्चुयाण य कप्पाणं अंतरा पुणरवि जाव अहेसत्तमाए, एवं आरणअच्चुयाणं गेवेज्जविमाणाण य अंतरा पुणरवि जाव अहेसत्तमाए, एवं गेवेज्जविमाणाणं अणुत्तरविमाणाण य अंतरा पुणरवि जाव अहेसत्तमाए, एवं अणुत्तरविमाणाणं ईसिप्पन्भाराए य पुणरवि जाव अहेसत्तमाए उववाएयव्वो // 670 // आउ• क्काइए णं भंते ! इमीसे रयणप्पभाए सक्करप्पभाए य पुढवीए अंतरा समोहए समोहणित्ता जे भविए सोहम्मे कप्पे आउक्काइयत्ताए उववज्जित्तए सेसं जहा पुढ विकाइयस्स जाव से तेणठेणं, एवं पढमदोच्चाणं अंतरा समो. हए जाव ईसिप्पन्भाराए उववाएयन्वो, एवं एएणं कमेणं जाव तमाए अहे. सत्तमाए य पुढवीए अंतरा समोहए 2 ता जाव ईसिप्पन्भाराए उववाएयवो
SR No.004390
Book TitleAngpavittha Suttani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorRatanlal Doshi, Parasmal Chandaliya
PublisherAkhil Bharatiya Sadhumargi Jain Sanskruti Rakshak Sangh
Publication Year1982
Total Pages1476
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari, agam_acharang, agam_sutrakritang, agam_sthanang, agam_samvayang, agam_bhagwati, agam_gyatadharmkatha, agam_upasakdasha, agam_antkrutdasha, & agam_anutta
File Size23 MB
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