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________________ समवाओ स०५७ से 63 381 अंतरे प० / एवं दगभासस्स केउयस्स य संखस्स य जूयस्स य दयसीमस्स ईस. रस्स य / मल्लिस्स णं अरहओ सत्तावण्णं मणपज्जवणाणिसया होत्था। महाहिमवंतरुप्पीणां वासहरपव्वयाणं जीवाणं धणुपिटुं सत्तावणं सत्तावणं जोयणसहस्साई दोणि य तेणउए जोयणसए दस य एगूणवीसइभाए जोयणस्स परिक्खेवेणं प० / / 57 / / पढमदोच्चपंचमासु तिसु पुढवीसु अट्ठावण्णं णिरयावाससयसहस्सा प० / णाणावरणिज्जस्स वेयणियआउयणामअंतराइयस्स एए सि णं पंचण्हं कम्मपयडीणं अट्ठावण्णं उत्तरपयडीओ पण्णत्ताओ। गोथूभस्स णं आवासपव्वयस्स पच्चत्थिमिल्लाओ चरमंताओ. वलयामुहस्स महापायालस्स बहुमज्झदेसभाए एस णं अट्ठावण्णं जोयणसहस्साई अबाहाए अंतरे प० / एवं चउदिसि पि णेयव्वं / / 58 // चंदस्स णं संवच्छरस्स एगमेगे उऊ एगूणसद्धिं राइंदियाई राइंदियग्गेणं प० / संभवे णं अरहा एगूणसढिं पुव्वसयसहस्साई अगारमज्झे वसित्ता मुंडे जाव पव्वइए / मल्लिस्स णं अरहओ एगूणसहिँ ओहिणाणिसया होत्था / / 59 / / एगमेगे णं मंडले सूरिए सहिए सट्ठिए मुहुत्तेहिं संघाइए / लवणस्स णं समुहस्स सर्व्हि णागसाहस्सीओ अग्गोदयं धारंति / विमले णं अरहासद्धिं धणूई उई उच्चत्तेणं होत्था / बलिस्स णं वइरोयणिंदस्स सद्धिं सामाणियमाहस्सीओ पण्णत्ताओ। बंभस्सणं देविंदस्स देवरणो सद्धिं सामाणिय. साहस्सीओ पण्णत्ताओ / सोहम्मीसाणेसु दोसु कप्पेसु सढि विमाणावाससयसहस्सा प० // 60 // पंचसंवच्छरि यस्स णं जुगस्स रिउमासेणं मिजमाणस्स इगसद्धिं उऊमासा प० / मंदरस्त गं पव्वयस्स पढमे कंडे इगस द्विजोयणसहस्साई उडू उच्चत्तेणं प० / चंदमंडले गं एगसढिविभागविभाइएं समंसे प० / एवं सूरस्स वि / / 61 / / पंचसंवच्छरिए णं जुगे बासटिं पुणिमाओ बावहिँ अमावसाओ पण्णत्ताओ। वासुपुजस्स णं अरहओ ब सढि गणा बासढिं गणहरा होत्था / सुक्कपक्खस्स णं चंदे बासलुि भागे दिवसे दिवसे परिवड्डइ, ते चेव बहुलपक्खे दिवसे दिवसे परिहायइ / मोहम्मीसा गेसु कप्पेसु पढ़मे पत्थडे पढमावलियाए एगमेगाए दिसाए बासठिं बासहिँ विमाणा प० / सव्वे वेमाणियाणं बासहिँ विमाणपत्थडा पत्थडग्गेण प० // 62 // उसमे णं अरहा कोसलिए तेसद्धिं पुव्वतयसहस्साई महारायमज्झे वसित्ता मंडे भवत्ता अगाराओ अणगारियं पधइए / हरिवासरम्मयवासेसु मणुस्सा तेसहिए राइदिए हिं संपत्तजोव्वणा भवंति / णिसढे णं पव्वए तेसलुि सूरोदया प० / एवं
SR No.004390
Book TitleAngpavittha Suttani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorRatanlal Doshi, Parasmal Chandaliya
PublisherAkhil Bharatiya Sadhumargi Jain Sanskruti Rakshak Sangh
Publication Year1982
Total Pages1476
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari, agam_acharang, agam_sutrakritang, agam_sthanang, agam_samvayang, agam_bhagwati, agam_gyatadharmkatha, agam_upasakdasha, agam_antkrutdasha, & agam_anutta
File Size23 MB
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