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________________ (२२६२) नेमिनाथः सं० १९१६ मि। वै। सु। ७ श्रीनेमिजिनबिंब भ .. (२२६३) पार्श्वनाथः सं० १९१६ मि। वै। सु ७ पार्श्वजिनबिंबं। श्रीजिनसौभाग्यसूरिभिः ( २२६४) पार्श्वनाथः सं० १९१६ मि० वै० सं० ७ श्रीपार्श्वजिनबिंब .. (२२६५) पार्श्वनाथः सं० १९१६ मि० वै० सु० ७ पार्श्वजिनबिंबं......" (२२६६) जिनकुशलसूरि-पादुका-रौप्य ॥ सं० १९१६ ॥ श्रीजिनकुशलसूरीणां ॥ (२२६७) जिनकुशलसूरि-पादुका सं० १९१७ रा वर्षे १७८२ प्रवर्त्तमाने मासोत्तममासे माधवमासे कृष्णपक्षे नवमी ९ तिथौ शनिवारे महाराजाधिराज महारावलजी श्रीरणजीतसिंघजी विजयराज्ये श्रीजैसलमेरुणा बृहत्खरतरभट्टारकगच्छेन श्रीसंघेन श्रीअमरसागर मध्ये श्रीजिनकुशलसूरि सद्गुरूणां शाला स्थंभ पादुका कारापितं श्रीजिनमहेन्द्रसूरिपट्टालंकार श्रीजिनमुक्तिसूरिभिः। धर्मराज्ये श्रीजिनभद्रसूरिशाखायां पं० । पद्महंसमुनि तत् शिष्य पं० । साहिबचंद्र मुनि प्रतिष्ठितं उपदेशात् पं० अगरचंदमुनि। भद्रं भूयात् ।। ___ (२२६८) पादुका-चतुष्टय सं० १९१७ मिति माघ सुदि ५ वार शुक्र ॥ जं। यु।प्र। भ। श्रीजिनसौभाग्यसूरिजी विजयराज्ये। उ। श्रीआणंदवल्लभगणि तत् शिष्य पं। सदालाभ प्रतिष्ठितं॥ (१) जं। यु। भ। श्रीजिनकुशलसूरि चरणन्यासः (२) जं। यु। भ। श्रीजिनचंद्रसूरिजी चरणन्यासः (३) जं। यु। भ। श्रीजिनजयशेखरसूरिजी चरणन्यासः (४) जं। यु। भ। श्रीजिननंदीवर्द्धनसूरिजी चरणन्यासः बाबू श्री ज्वालानाथजी तद्भार्या मनाबीबी तत्पुत्र चि बाबू श्री भैरूं प्रसाद जी कारापितं ॥ २२६२. सुपार्श्वनाथ मंदिर, (नाहटों में), बीकानेर : ना० बी०, लेखांक १७३७ २२६३. अजितनाथ मंदिर, नागपुरः । २२६४. सुपार्श्वनाथ मंदिर (नाहटों में), बीकानेर : ना० बी०, लेखांक १७३८ २२६५. सुपार्श्वनाथ मंदिर, नाहटों में बीकानेर : ना० बी०, लेखांक १७३५ २२६६. पंचायती, जयपुर : प्र० ले० सं०, भाग २, लेखांक ५८९ २२६७. हिम्मतराम बाफणा का मंदिर, अमरसागर, जैसलमेर: पू० जै०, भाग ३, लेखांक २५४२ २२६८. दादाबाड़ी नं० २, मधुवन सम्मेतशिखरः भँवर० (३९४) (खरतरगच्छ-प्रतिष्ठा-लेख संग्रह:) Jain Education International For Personal & Private Use Only www.jainelibrary.org
SR No.004075
Book TitleKhartargaccha Pratishtha Lekh Sangraha
Original Sutra AuthorN/A
AuthorVinaysagar
PublisherPrakrit Bharti Academy
Publication Year2005
Total Pages604
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size14 MB
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