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________________ माघमासे धवलषष्ठि तिथौ बुधवासरे श्रीशांतिनाथजिनेद्राणां प्रासादोयम् । श्री कलकत्ता नगर वास्तव्य: श्री समस्त संघेन कारितं प्रतिष्ठितः श्रीखरतरगच्छेश भट्टारक श्रीजिनहर्षसूरिभिः । श्रीरस्तु ॥ (१७६२ ) शिलालेखः (१) संवत् १८७१ रा मिते माघ सुदि ११ तिथौ श्रीबीकानेर नगरे श्रीबृहत्खरतरगच्छी (२) य श्रीसंघेन श्रीसुपार्श्वनाथजिनचैत्यं कारितं प्रतिष्ठापितं च जंगमयुगप्रधान भट्टारक शिरोमणि श्री १०८ श्रीजिनचंद्रसूरि प (३) ट्ट प्रभाकर श्री भट्टारक श्रीजिनहर्षसूरि धर्मराज्ये सति । श्रेयसेस्तु सर्वेषां । सूत्रधार दयाराम कृतिरियं श्री ॥ (४) जैसे सिलावटा ॥ (१७६३ ) सर्वतोभद्रयंत्रम् श्रीसर्वतोभद्रयंत्रमिदं कारितं प्रतिष्ठितं च सं० १८७२ मिते ज्येष्ठ वदि द्वितीया दिने उ० श्रीक्षमाकल्याण गणिभिः बीकानेर नगरे । : (१७६४ ) तत्त्वधर्मगणि-पादुका सं० १८७२ मिते आषाढ़ सुदि १ श्रीबृहत्खरतर श्रीसंघेन उ० श्रीतत्त्वधर्मजिद्गणीनां चरणे कमले कारिते प्रतिष्ठा । (१७६५) राजप्रियगणि-पादुका सं० १८७२ मि० आषाढ़ सुदि १ श्रीबृहत्खरतर श्रीसंघेन वा० राजप्रिय गणिनां चरणकमले कारिते प्रतिष्ठापिते । (१७६६ ) लक्ष्मीप्रभगणि-पादुका सं० १८७२ मि० आषाढ़ सुदि १ श्रीबृहत्खरतर श्रीसंघेन वा० लक्ष्मीप्रभगणिनां पादुके कारिता (१७६७) ताम्रपत्र - लेख : ॥ स्वस्ति श्रीराजराजेश्वर महाराजाधिराज महाराजा शिरोमणि महाराजा श्रीसूरतसिंह जी महाराज कुंवर श्रीरतनसिंह जी वचनात् श्री जी साहबां परसन होय गाँव नाल में दादैजी श्रीजिनकुशलसूरिजी पादुका छै तिणांरी पूजा हुवै छै सु जमी वीघा ७५० अखरे वीघा साढी सातसै डोरी वीसरी चढाई छै सो तलाव तेजोलाव रे लारली गाँव नाल सुं आथुणवै पासै री सांसण तांबापत्र कर दीवी छै सु दादेजी पादुकावांरी पूजा टैहल वंदगी करसी सु जमी वाहसी जोड़सी वा मुकातै देसी तैरो हासल लेसी म्हांरौ पूत पोतो पालीया जासी सं० १८७३ मिति वैशाख सुदि ९ वार सोमवार श्लोक ॥ स्वदत्तं परदत्तं वा ये हरंति १७६२. सुपार्श्वनाथ जिनालय, नाहटों में, बीकानेर: ना० बी०, लेखांक १७२२ १७६३. गौड़ी पार्श्वनाथ जिनालय, गोगादरवाजा, बीकानेर : ना० बी०, लेखांक १९५४ १७६४. रेलदादाजी, बीकानेर : ना० बी०, लेखांक २०४५ १७६५. रेलदादाजी, बीकानेर : ना० बी०, लेखांक २०४६ १७६६. रेलदादाजी, बीकानेर : ना० बी०, लेखांक २०४७ १७६७. बड़ा उपाश्रय, बीकानेर: ना० बी०, लेखांक २६१५ (३१२) Jain Education International खरतरगच्छ-प्रतिष्ठा-लेख संग्रह: For Personal & Private Use Only www.jainelibrary.org.
SR No.004075
Book TitleKhartargaccha Pratishtha Lekh Sangraha
Original Sutra AuthorN/A
AuthorVinaysagar
PublisherPrakrit Bharti Academy
Publication Year2005
Total Pages604
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size14 MB
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