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________________ साहस्सी पुरथिमिळ बाह० एवं चउदिसिंपि, एवं तारागणाणवि णवरि दो देवसाहस्सीओ परिवहति, तं०-सीहरूबधारीणं देवाणं पंचदेवसता पुरस्थिमिई वाहं परिवहति एवं चउदि. सिपि ।१९९। एतेसि णं भंते ! चंदिमसूरियगहगणणक्खत्ततारारूवाणं कयरे कयरेहिंतो सिग्धगती वा मंदगती वा ?, गो! चंदेहितो सूरा सिग्धगती सूरेहितो गहा सिग्घगती गहेहितो णक्खना सिग्धगती णक्वतेहितो तारा सिग्धगती, सवप्पगती चंदा सबसिग्धगतीओ ताराओ।२००। एएसिं गं भंते ! चंदिमजावतारारुवाणं कयरे कयरेहितो अपिडिढया वा म. हिदिढया वा?, गो! तारारूवेहितो णक्खत्ता महिढीया णक्खत्तेहिंतो गहा महिइढीया महेहितो सूरा महिड्ढीया युरेहितो चंदा महिढीया, सबप्पड्ढिया तारा सबमहिडिया चंदा ।२०१। जंबुदीव णं भंत! दीवे तारारुवस्स२य एस णं केवतियं अबाधाए अंतरे पं०?, गो०! दुबिहे अंतरे ५००-वाघातिमे य निवाघाइमे य (पा० बाघाइए य निवाघाइए य तत्व णं जे से वाघातिमे से जहदोणि य छाबडे जोयणसए उको चारस जोयणसहस्साई दोण्णि य बायाले जोयणसए तारारुवस्सय अवाहाए अंतरे ५० तत्थ णं जे से णि वाघातिमे से जहरू पंचधणुसयाई उको दो गाउयाई तारारूव जाव अंतरे पं०।२०२। चंदस्स णं भंते ! जोतिसिंदस्स जोतिसरनो कति अग्गमहिसीओ पं०?, गोब! चत्तारि अग्गमहिसीओ पं०२०-चंदप्पभा दोसिणाभा अधिमाली पर्भकरा, एस्थ णं एगमेगाए देवीए चत्तारि २ देवसाहस्सीओ परिवारे य, पभू णं ततो एगमेगा देवी अण्णाई चत्तारि २ देवीसहस्साई परिवारं विउवित्तए, एवामेव सपुवावरेणं सोलस देवसाइस्सीओ पं०. से तं तुडिए ।२०३। पभू णं भंते! चंदे जोतिसिंदे जोतिसराया चंदवडिसए विमाणे सभाए सुधम्माए चंदसि सीहासणंसि तुडिएण सद्धिं दिवाई भोगभोगाई भुंजमाणे विहरितए?, णो तिणद्वे समढे, से केणद्वेणं भंते ! एवं बुचति-नो पभू चंदे जोतिसराया चंडवडेसए विमाणे सभाए सुधम्माए चंदसि सीहासणंसि तुडिएणं सदि दिवाई भोगभोगाई भुंजमाणे विहरितए?.गो! चंदस्स जोतिसिंदस्स जोतिसरण्णो चंदवडेंसए विमाणे सभाए मुहम्माए जोतिसमाणवगंसि चेतियर्खभंसि वइरामएम गोलबहसमुग्गएम पहुयाओ जिणसकहाओ सविणक्खित्ताओ चिट्ठति जाओ णं चंदस्स जोतिसिंदस्स जोतिसरनो अनेसि च बहुर्ण जोतिसियाणं देवाण य देवीण य अञ्चणिजाओ जाव पजुवासणिजाओ, तासिं पणिहाए नो पभू चंदे जोतिसराया चंदवडिं० जाव चंदसि सीहासणंसि जाव भुंजमाणे विहरित्तए, से एएणट्टेणं गो! नो पभू चंदे जोतिसराया चंदवडेंसए विमाणे सभाए सुधम्माए चंदंसि सीहासणंसि तुडिएण सदि दिवाई भोगभोगाई भुंजमाणे विहरित्तए, अदुत्तरं च णं गो ! पभू चंदे जोतिसिंदे जोतिसराया चंदबडिसए विमाणे सभाए सुधम्माए चंदसि सीहासणंसि चउहिं सामाणियसाहस्सीहिं जाव सोलसहिं आयरक्खदेवाणं साहस्सीहिं अन्नेहिं वहहिं जोतिसिएहिं देवेहिं देवीहि य सदि संपरिखुड़े महयाहयणगीइवाइयतीतलतालतुडियषणमुइंगपडुप्पवाइयवेणं दिवाई भोगभोगाई मुंजमाणे विहरित्तए, केवलं परियारतुडिएण सदि भोगभोगाई बुद्दीए, नो चेवणं मेहुणवत्तियं । २०४। सरस्सणं भंते ! जोतिसिंदस्स जोतिसरनो कइ अम्ममहिसीओ पं०?, गो०चत्तारि अगमहिसीओ पं०तं०-सूरपभा आयवाभा अचिमाली पभंकरा, एवं अवसेसं जहा चंदस्स गरि सूरवर्दिसए विमाणे सूर॑सि सीहासणंसि तहेव सबेसिपि गहाईणं चत्तारि अम्गमहिसीओ० त०-विजया वेजयंती जयंती अपराजिया, तेसिपि तहेब । २०५। चंदविमाणे ण भंते! देवाणं केवतियं कालं ठिती पं०?.एवं जहा ठितीपए तहा भाणियवा जाव ताराणं । २०६। एतेसिं णं भंते ! चंदिममरियगहणक्खत्ततारारूवाणं कयरे कयरेहितो?, गो०! चंदिमसूरिया एते णं दोषिणवि तुला सवत्थोवा संखेजगुणा णखत्ता संखेजगुणा गहा संखेजगुणाओ तारगाओ।२०७। जोइसुद्देसओ समत्तो। कहिणं भंते ! वेमाणियाणं देवाणं विमाणा पं० कहिं गं भंते! वेमाणिया देवा परिवसंति ?, जहा ठाणपदे नहा सर्व भाणियच णवरं परिसाओ भाणितत्राओ जाव सके, अमेसि च बहूणं सो. धम्मकप्पवासीणं देवाण य देवीण य जाब विहरति । २०८ा सकस्स णं भंते ! देविंदस्स देवरनो कति परिसाओ पं०१, गो! तओ परिसाओ पं० २०-समिता चंडा जाता, अभितरिया समिया मज्झिमिया चंडा वाहिरिया जाता, सकस्स णं भंते ! देविंदस्स देवरभो अम्भितरियाए परिसाए कति देवसाहस्सीओ पं०१, मज्झिमियाए परि० तहेव बाहिरियाए. पुच्छा, गो०! सकस्स देविंदस्स देवरको अम्भितरियाए परिसाए चारस देवसाहस्सीओ पं० मज्झिमियाए परिसाए चउदस देवसाहस्सीओ पं० बाहिरियाए परिसाए सोलस देवसाह - स्सीओ पं०, तहा अम्भितरियाए परिसाए सत्त देवीसयाणि मज्झिमियाए उच्च देवीसयाणि वाहिरियाए पंच देवीसयाणि पं०.सकस्स णं भंते ! देविंदस्स देवरनो अम्भितरियाए परिसाए ठि 40? एवं मजिझमियाए बाहिरियाएवि, गो! सकस्स देविंदरस देवरनो अभितरियाए परिसाए पंच पलिओवमाई ठिती पं० मज्झिमियाए परिसाए चत्तारि पलिओवमाई ठिती पं० बाहिरियाए परिसाए देवाणं तिन्नि पलिओवमाई ठिती अभितरियाए परिसाए देवीणं तिनि पलिओवमाई ठिती पं० मज्झिमियाए दुन्नि पलिओ. वमाई ठिती पं०बाहिरियाए परिसाए एग पलिओवमं ठिती पं०, अहो सो चेव जहा भवणवासीणं, कहिं णं भंते ! ईसाणकाणं देवाणं विमाणा पं०१ तहेव सर्व जाव ईसाणे एत्य देविंद देव० जाव विहरति, ईसाणस्स णं भंते ! देविंदस्स देवरण्णो कति परिसाओ पं०?, गो० तओ परिसाओ पं० सं०-समिता चंडा जाता, तहेब सर्व णवरं अम्भितरियाए (१६५) ६६० जीवाजीवाभिगमः, nि -३ मुनि दीपरत्नसागर
SR No.003914
Book TitleAagam Manjusha 14 Uvangsuttam Mool 03 Jivajivaabhigam
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Sagaranandsuri
PublisherDeepratnasagar
Publication Year2012
Total Pages76
LanguagePrakrit
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, & agam_jivajivabhigam
File Size54 MB
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