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________________ ( ४७ ) जिए सत्य कारण होमी रे, वल्लन पणे निजदेह ॥ मूर्ख पण जग जीवतो रे, शास्त्रें को नर तेह | ॥ सकुं० ॥ ३३ ॥ क्षिप्र करोने सजता रे, महारी देवी साथ || देशुं दुःखने जलांजली रे, ए निश्चय माय ॥ सतुं ॥ ३४ ॥ इम कहेतां नृप वारिर्ज रे, बहु परे सर्व प्रधान || पण विरमे नहीं मरणथी रे, देवी मोह निदान || रंगी० ॥ ३५ ॥ नरथ करतां नवि चले रे, कोइ मंत्री नुं मन्न ॥ ते जण मौन लेई रह्या रे, रोता मंत्री रतन्न || रंगी० ॥ ३६ ॥ पूरी ढाल इग्यारमी रे, कांति विजय कहे एह || मोह शु जट जीते जिके रे, होय नर सुखिया ते ॥ २० ॥ ३७ ॥ ॥ दोहा ॥ " ॥ हवे नूपें मंत्रीशने देखी करता ढील ॥ प्रेस्या पुरुष बीजा वली, करवा साज हवील ॥ १ ॥ तुरत मंगावी पालखी, रयण जमित मनुहार || नवरावे कलेवर नारिनुं, कनक कलश जलधार ॥ २ ॥ कुंकुम चंदन मृगमदे, कर्पूरें करी लेप ॥ कुसुम सरसुं पूजि कें, कस्यो धूप उत्क्षेप ॥ ३ ॥ शिबिका मांहे थापिने, राणीनो देह चाले नृप गोलो तटें, शिबिका यागे Jain Educationa International For Personal and Private Use Only www.jainelibrary.org
SR No.003682
Book TitleMahabal Malayasundarino Ras
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShravak Bhimsinh Manek
PublisherShravak Bhimsinh Manek
Publication Year1907
Total Pages324
LanguageGujarati
ClassificationBook_Devnagari
File Size12 MB
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