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उवसंहारो इह एस पाहुडत्था, अभव्वजणहिययदुल्लाहा इणमो। उक्कित्तिया भगवई, जोइसरायस्स पण्णत्ती॥ एस गहियाऽवि संता, थद्धे गारविय माणि-पडिणीए। अबहुस्सए ण देया, तविवरीए भवे देया॥ सद्धा-धिति-उट्ठाणुच्छहह-कम्म-बल-विरिय-पुरिसकारेहिं। जो सिक्खिओऽवि संतो, अभायणे पक्खिवेजाहिं॥ सो पवयण-कुल-गण-संघबाहिरो ण्णण-विणय-परिहीणो। अरहंत-थेर-गणहरमेरं किर होइ वोलीणो॥ तम्हा धितिउट्ठाणुच्छाह कम्म-बल-विरियसिक्खिणाणं। धारेयव्वं णियमा ण य अविणएसु दायव्वं ॥ वीरवरस्स भगवओ, जर-मरण-किलेस-दोसरहियस्स। वंदामि विणयपणओ, सोक्खुप्पाए सया पाए॥
॥ सूरियपण्णत्ती समत्ता॥