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________________ ६ मासिया भासित्त मासिया णं उवस्सया मासिया णं कप्पति चत्तारि भासाओ कप्पइ तओ . कप्पति तओ कप्पति तओ मासिया णं वेत् संथारा मासिय पुरिसे मासिय मासियं णं मासियं भिक्खुपडिमं अच्छिसि रित्त अणगारस्स इत्थी वा केइ उवस्यं पायसि खाणु मासियं भिक्खुपडिमं सूरिए रियं रियत्तए मासि भिक्खुपडिमं ठाणं ठवित्त मासियं णं भिक्खुपडिमं सरक्खेणं मासियं भिक्खुपडिमं भत्तमासेण वा मासियं णं भिक्खुपडिमं जाव मासि भिक्खुपडिमं Jain Education International जत्थेव णो से दशाश्रुतस्कन्धसूत्रम् सीयंति अहिंस मासिया भिक्खु - पडिमा १२ एगराइया भिक्खुपडिमा मेहुणं पडि सेवमाणे राइ - भोअणं भुंजमाणे सबले पृष्ठ २५१ पृष्ठ २५३ पृष्ठ २५४ पृष्ठ २५५ पृष्ठ २५७ पृष्ठ २५८ पृष्ठ २५६ पृष्ठ २६० पृष्ठ २६१ पृष्ठ २६४ नो कप्पति पृष्ठ २६६ सीओदयवियडेण आसस्स वा हथिस्स पच्चोसक्कित्तए पृष्ठ २६६ छायाओ पृष्ठ २६८ पृष्ठ २७१ पृष्ठ २३६ दशा २ दशा २ रातिणिअ - परिभासी राय - पिडं भुंजमाणे सबले वयण-संपया बहुजणस्स यारं वायणा- संपया संगह - परिन्ना अट्ठमा संजलणे संति उड्ढं देवा देवलोगंसि साहू संति इमस्स सुचरियस्स साहुणी सत्त-मासिया भिक्खु - पडिमा सद्द - करे सढे नियडी - पण्णाणे सप्पी जहा अंडउडं सव्वकामविरत्तस्स खमणो सव्वाओ पाणाइ-वायाओ जीवाए सव्व - धम्मरुई यावि भवति सव्वाओ कसाय - दंतकट्ठण्हाण जाव-जीवाए सरीर-संपया सीसम्म जो पहणइ सरक्ख पाणि- पाए सागरिय - पिंड जाव साइणा परिनिव्वुए साहारा जे इ सीतोदग - विडंसि कायं बोलित्ता भवति सीसं वेढेण जे केइ For Private & Personal Use Only दशा २ दशा २ दशा ४ दशा ६ दशा ४ दशा ४ दशा १ दशा १० दशा १० दशा ७ दशा १ दशा १ दशा ६ दशा ५ दशा १० दशा १० दशा १० दशा ४ दशा ६ दशा १ दशा २ पृष्ठ २६८ दशा ६ दशा १० दशा ६ www.jainelibrary.org
SR No.002908
Book TitleAgam 27 Chhed 04 Dashashrut Skandh Sutra Sthanakvasi
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAtmaram Maharaj
PublisherPadma Prakashan
Publication Year2001
Total Pages576
LanguageHindi, English
ClassificationBook_Devnagari, Book_English, Agam, Canon, Conduct, & agam_dashashrutaskandh
File Size11 MB
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