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________________ FOR955555555555 (५) भगवई भतं . ३३ -१२-१२४/स्त.३४८३५७J5555555555 p C%听听听听听听听听听听听听听听听听听听乐乐明明明明明明明明 乐乐乐乐乐玩玩乐乐乐乐乐乐乐乐乐乐乐乐 ॥३३-३.१-११॥ ॥ततियं एगिदियसयं समत्तं ॥३३-३॥ चउत्थे एगिदियसए पढमाइएक्करसपज्जता उद्देसगा [सु. १. बिइयएगिदियसयाणुसारेणं काउलेस्सएगिदियत्तव्वयानिद्देसो] १. एवं काउलेसस्सेहि वि सयं भाणितव्वं, नवरं 'काउलेस्स' त्ति अभिलावो। ३३-४.१-११॥ चउत्थं एगिदियसयं समत्तं ॥३३-४॥ पंचमे एगिंदियसए पढमाइएक्करसपज्जता उद्देसगा [सु. १-२. पढमएगिदियसयाणुसारेणठ भवसिद्धियएगिदियवत्तव्वयानिद्देसो ] १. कतिविहा णं भंते ! भवसिद्धिया एगिदिया पन्नत्ता ? गोयमा ! पंचविहा भवसिद्धिया एगिदिया पन्नत्ता, तं जहा-पुढविकाइया जाव वणसतिकाइया । भेदो चउक्कओ जाव वणस्सतिकाय त्ति । २. भवसिद्धियअपज्जत्तसुहुमपुढविकाइयाणं भंते ! कति कम्मपगडीओ पन्नत्ताओ? एवं एतेणं अभिलावेणं जहेव पढमिल्लं एगिदियसयं तहेव भवसिद्धीयसयं पि भाणियव्वं । उद्देसगपरिवाडी तहेव जाव अचरिम त्ति। ॥ ३३-५.१-११॥ ॥ पंचम एगिदियसयं समत्तं ॥३३-५॥ छटे एगिंदियसए पढमाइएक्करसपज्जता उद्देसगा [सु. १-११. पढमएगिदियसयाणुसारेणं कण्हलेस्स-भवसिद्धियएगिदियवत्तव्वयानिआँसो ]१. कतिविहा णं भंते ! कण्हलेस्सा भवसिद्धीया एगिंदिया पन्नत्ता ? गोयमा ! पंचविहा कण्हले स्सा भवसिद्धीया एगिदिया पन्नत्ता, पुढ विकाइया जाव वणस्सतिकाइया । २. है कण्हलेस्सभवसिद्धीयपुढविकाइया णं भंते ! कतिविहा पन्नत्ता ? गोयमा ! दुविहा पण्णत्ता, तं जहा-सुहुमपुढविकाइया य, बायरपुढविकाइया य । ३. कण्हलेस्सभवसिद्धीयसुहुमपुढविकायियाणं भंते ! कतिविहा पन्नत्ता ? गोयमा ! दुविहा पन्नत्ता, तं जहा-पज्जत्तगा य अपज्जत्तगाय। ४. एवं बायरा वि। ५. एवं एतेणं के अभिलावेणं तहेव चउक्कओ भेदो भाणियव्वो। ६. कण्हलेस्सभवसिद्धरयअपज्जत्तासुहुमपुढविकाइयाणं भंते ! कति कम्पगडीओ पन्नत्ताओ? एवं एएणं अभिलावेणं जहेव ओहिउद्देसए तहेव जाव वेदेति त्ति । ७. कतिविधा णं भंते ! अणंतरोववन्नगा कण्हलेस्सा भवसिद्धीया एगिदिया पन्नत्ता ? गोयमा ! पंचविहा अणंतरोववन्नगा जाव वणस्सतिकाइया। ८. अणंतरोववन्नगकण्हलेस्सभवसिद्धीयपुढविकाइया णं भंते ! कतिविहा पन्नत्ता ? गोयमा ! दुविहा पन्नत्ता, तं जहा-सुहुमपुढविकाइया य, बायरपढविकाइया य । ९. एवं दुपओ भेदो। १०. अणंतरोववन्नगकण्हलेस्सभवसिद्धीयसुहुमपुढविकाइयाणं भंते ! कति कम्मपगडीओ पन्नत्ताओ? एवं एएणं अभिलावेणं जहेव ओहिओ अणंतरोववन्नो उद्देसओ तहेव जाव वेदेति । ११. एवं एतेणं अभिलावेणं एक्कारस वि उद्देसगा तहेव भाणियव्वा जहा ओहियसए जाव अचरिमो त्ति । ॥ ३३-६.१-११॥ ॥ छ8 एगिदियसतं समत्तं ॥ ३६-६॥ सत्तमे एगिंदियसए पढमाइएक्कारसपज्जंता उद्देसगा | सु. १. छट्ठएगिदियसयाणुसारेणं नीललेस्सभवसिद्धियएगिदियवत्तव्वयानिद्देसो] १. जहा कण्हलेस्सभवसिद्धीए सयं भणियं एवं नीललेस्सभवसिद्धीएहि वि सयं भाणियव्वं ।।। ३३-७.१-११ ।। ।। सत्तमं एगिदियसतं समत्तं ।। ३३-७॥ अट्ठमे एगिदियसए पढमाइएक्कारसपज्जता उद्देसगा [सु. १. छट्ठएगिदियसयाणुसारेणं काउलेस्सभवसिद्धियएगिदियवत्तव्वयानि(सो] १. एवं काउलेस्सभवसिद्धीएहि वि सयं । ॥३३-८.१-११॥ ॥ अट्ठमं एगिंदियसयं समत्तं ॥३३-८॥ नवमे एगिदियसए पढमाइनवमपज्जंता उद्देसगा [सु. १-२. पंचमएगिदियसयउद्देसनवगाणुसारेणं अभवसिद्धियएगिदियवत्तव्वयानिहेसो ] १. कतिविधा णं भंते ! के अभवसिद्धीया एगिदिया पन्नत्ता ? गोयमा ! पंचविहा अभवसिद्धीया० पन्नत्ता, तं जहा-पुढविकाइया जाव वणस्सतिकायिया। २. एवं जहेव भवसिद्धीयसयं, नवरं नव उद्देसगा, चरिम-अचरिम-उद्दसकवज्ज । सेसं तहेव। ॥ ३३-९.१-९॥ ॥ नवमं एगिंदियसयं समत्तं ॥ ३३-९॥ दसमे एगिदियसए पढमाइनवमपज्जंता उद्देसगा [सु. १. छट्ठएगिदियसयउद्देसनवगाणुसारेणं कण्हलेस्सअभवसिद्धियएगिदियवत्तव्वयानिद्देसो ] १. एवं कण्हलेस्सअभवसिद्धीयसयं पि। ।। ३३१०.१-९॥ ॥ दसमं एगिंदियसयं समत्तं ॥ ३३-१०॥ एक्कारसमे एगिदियसए पढमाइनवमपज्जता उद्देसगा [ सु. १. सत्तमएगिदियसयउद्देसनवगाणुसारेणं नीललेस्सअभवसिद्धियएगिदियवत्तव्वयानिद्देसो] १. नीललेस्सअभवसिद्धीयएगिदिएहि वि सयं । ॥ ३३-११.१-९॥३३-११ ॥ बारसमे एगिदियसए 9乐听听听听听乐听听听听听听听听听听听听听听玩听听听听听听听听听听听听听听听听听乐乐乐乐乐乐乐乐明乐 KOY5 5555555555555 श्री आगमगुणमजूषा- ५७२ ॥555555555 5 OR
SR No.002601
Book TitleAgam Guna Manjusha
Original Sutra AuthorN/A
AuthorGunsagarsuri
PublisherJina Goyam Guna Sarvoday Trust Mumbai
Publication Year1999
Total Pages1868
LanguagePrakrit, Gujarati, Hindi, English
ClassificationBook_Devnagari, Agam, & Canon
File Size85 MB
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