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प्रतिमा समक्ष मारु एक-एक स्वरुप मूकी उत्कृष्ट कोटीनी भक्ति भावना स्नात्र पूजा वगेरे क.
प्रभु! मारी आ आजनी जिनेश्वर परमात्मानी भक्तिना प्रभावे आखा जगतनुं कल्याण थाओ, विश्वमात्रमा जैनशासन, साम्राज्य प्रवर्तो ! जिनशासनना स्थावर जंगम तीर्थोना प्रभाव सर्वत्र व्यापी जाओ ! पूजनीय साधु साध्वीजी भगवंतोना संयमजीवन शक्यत : निरतिचार थाओ ! मने सम्यग्दर्शन, सम्यगज्ञान अने सम्यग्चारित्रनी साथे मोक्ष पदनी प्राप्ति थाओ.
अविधि आशातना मिच्छामि दुक्कडम्.... .
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