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________________ षटू लेश्या स्वरूप वर्ण रस गंध स्पर्श लक्षण कृष्णलेश्या वर्ण-कौए के समान काला रस-नीम के समान कड़वा -मृत पशु के तुल्य, अत्यन्त दुर्गन्धमय स्पर्श-करोत की धार के समान तीक्ष्ण भाव-अत्यन्त रौद्र नील लेश्या वर्ण-मोर व भ्रमर के समान नीला, रस-मिर्च के समान तीखा, गंध-कुत्ते के कलेवर की गंध से भी भयानक स्पर्श-गाय की जीभ के समान खुरदरा, भाव-ईर्ष्या व लोभप्रधान। कापोत लेश्या वर्ण-कबूतर की गर्दन जैसा, रस-कच्चे आम जैसा कषैला, गंध-मृत सर्प जैसी. ५ वर्ण-तीक्ष्ण धारदार पत्ते जैसा। भाव-मायाप्रधान। तेजो लेश्या वर्ण-तो की चोंच सा लाल। रस-खट्टा, मीठा, पके आम जैसा। गंध-घिसे चन्दन के समान, स्पर्श-कोमल रुई के समान, भाव-विनम्न प्रियधर्मी। पदमलेश्या वर्ण-पीला, सूर्यमुखी फूल जैसा रस-अंगूर जैसा मीठा गंध-गुलाब के फूल व इतर जैसा स्पर्श-कोमल नवनीत भाव-भद्र परिणामी, संयम प्रधान शुक्ल लेश्या वर्ण-श्वेत कुन्दपुष्प समान। रस-मीठा-खीर के समान। गंध-फूलों के इतर के तुल्य, स्पर्श-कोमल, सिरीष पुष्प वत, भाव-अत्यन्त प्रशस्त शुभ ध्यानी। चित्र क्रमांक ६१ ILLUSTRATION No. 61
SR No.002494
Book TitleAgam 30 mool 03 Uttaradhyayana Sutra Sthanakvasi
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAmarmuni
PublisherPadma Prakashan
Publication Year2011
Total Pages726
LanguageHindi, Prakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_uttaradhyayan
File Size28 MB
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