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________________ २५. श्री लोकबिंदुसार पूर्व सूत्र पठन पाठन तत्परता गुण विभूषितेभ्यः श्री उपाध्यायेभ्यो नमः । पांचवां दिन-साधु पद । गुण २७ ( वर्ण-काला, आयंबिल उड़द का करना ) जाप-ॐ ह्रीं नमो लोए सव्व साहूणं। नवकारवाली २० । काउसग्ग २७ लोगस्स का। स्वस्तिक २७ । खमासमण २७ । प्रदक्षिणा २७ । ॥दोहा॥ अप्रमत्त जे नित रहे, नवि हरखे नवि सोचेरे। साधु सुधा ते आतमा, शु मूडे शुलोचेरे ॥ वीर०॥ . - १. सर्वतः प्राणातिपात विरमण व्रत गुण विभूषितेभ्यः श्री साधुभ्यो नमः । २. सर्वतो मृषावाद विरमण व्रत गुण विभूषितेभ्यः श्री साधुभ्यो नमः । ३. सर्वतोऽदत्तादान विरमण व्रत गुण विभूषितेभ्यः श्री साधुभ्यो नमः । ४. सर्वतो मैथुन विरमण व्रत गुण विभूषितेभ्यः श्री साधुभ्यो नमः। ५. सर्वतः परिग्रह विरमण व्रत गुण विभूषितेभ्यः श्री साधुभ्यो नमः । ( 13 )
SR No.002288
Book TitleSiddhachakra Navpad Swarup Darshan
Original Sutra AuthorN/A
AuthorSushilsuri
PublisherSushilsuri Jain Gyanmandir
Publication Year1985
Total Pages510
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size8 MB
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